पाठ्यक्रम: GS3/आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- केंद्रीय गृह मंत्री ने ‘स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) वार्षिक प्रतिवेदन, 2025’ जारी किया है।
प्रतिवेदन के प्रमुख बिंदु
- म्यांमार अफीम का वैकल्पिक वैश्विक स्रोत बनकर उभरा: वर्ष 2022 में अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा मादक पदार्थों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद म्यांमार वैश्विक अफीम आपूर्ति का एक प्रमुख वैकल्पिक स्रोत बनकर उभरा है।
- वर्ष 2021 से 2023 के बीच म्यांमार में अवैध अफीम की खेती में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा पोस्ता की खेती का क्षेत्रफल बढ़कर 45,200 हेक्टेयर तक पहुँच गया।
- म्यांमार का गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र अब केवल अफीम ही नहीं, बल्कि मेथामफेटामाइन (याबा टैबलेट्स) के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में भी विकसित हो गया है।
- पूर्वोत्तर भारत सर्वाधिक प्रभावित : म्यांमार में मादक पदार्थों के बढ़ते उत्पादन के कारण मणिपुर, मिजोरम एवं नागालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
- ये राज्य मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध अग्रिम मोर्चे पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
- छिद्रपूर्ण सीमा व्यवस्था: भारत-म्यांमार सीमा पर लागू मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR) ने ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कर दी हैं, जिनके कारण ये राज्य केवल पारगमन क्षेत्र न रहकर मादक पदार्थों के वितरण के सक्रिय केंद्र बनते जा रहे हैं।
- अफगानिस्तान मार्ग से मादक पदार्थों की तस्करी: पाकिस्तान सीमा के पार से ड्रोन आधारित मादक पदार्थों की तस्करी में विगत पाँच वर्षों के दौरान लगभग पाँच गुना वृद्धि हुई है, विशेष रूप से पंजाब में।
- यह वृद्धि दर्शाती है कि तस्करी नेटवर्क पारंपरिक सीमा निगरानी से बचने के लिए मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का अधिक संगठित एवं परिष्कृत उपयोग कर रहे हैं।
- अफगानिस्तान से संचालित दक्षिण एशियाई मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क पाकिस्तान के माध्यम से पंजाब एवं राजस्थान की स्थलीय सीमाओं तथा गुजरात एवं महाराष्ट्र के समुद्री तटों के रास्ते भारत में प्रवेश करता है।
भारत मादक पदार्थों की तस्करी का प्रमुख लक्ष्य क्यों है?
- भौगोलिक स्थिति: भारत दो प्रमुख वैश्विक मादक पदार्थ उत्पादक क्षेत्रों—गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान, पाकिस्तान एवं ईरान) तथा गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस एवं थाईलैंड)—के मध्य स्थित है।
- परिणामस्वरूप भारत लंबे समय से दोनों क्षेत्रों से होने वाली हेरोइन तस्करी से प्रभावित रहा है।
- विस्तृत स्थलीय एवं समुद्री सीमाएँ: भारत की 15,000 किलोमीटर से अधिक स्थलीय सीमा तथा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा है।
- म्यांमार, नेपाल एवं बांग्लादेश के साथ छिद्रपूर्ण सीमाएँ तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ तस्करी को सुगम बनाती हैं।
- बढ़ता घरेलू बाजार : भारत अब केवल मादक पदार्थों का पारगमन (Transit) देश नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ा उपभोक्ता बाजार भी बन चुका है।
- औषधि निर्माण का प्रमुख केंद्र : भारत विश्व के सबसे बड़े औषधि एवं अग्रदूत रसायनों के उत्पादकों में से एक है।
- यदि इन रसायनों की प्रभावी निगरानी न हो, तो उनका दुरुपयोग सिंथेटिक मादक पदार्थों के अवैध निर्माण में किया जा सकता है।
- नार्को-आतंकवाद: मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त धनराशि का उपयोग आतंकवादी संगठनों एवं उग्रवादी समूहों के वित्तपोषण में किया जाता है।
- विशेष रूप से भारत की पश्चिमी सीमा पर भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए इस धन का उपयोग किया गया है।
- समुद्री व्यापार का विस्तार : भारत के व्यस्त बंदरगाहों एवं बढ़ते कंटेनर यातायात के कारण वैध माल के बीच मादक पदार्थों को छिपाकर तस्करी करने की संभावना बढ़ जाती है।
- दुर्गम भू-भाग एवं सीमा संबंधी चुनौतियाँ : घने वन, पर्वतीय क्षेत्र, रेगिस्तान एवं नदी तटीय क्षेत्र प्रभावी निगरानी को कठिन बना देते हैं।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: पड़ोसी देशों के कुछ भागों में राजनीतिक अस्थिरता एवं कमजोर कानून-व्यवस्था के कारण मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन एवं तस्करी को बढ़ावा मिलता है।
मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रभाव
- आर्थिक प्रभाव: मादक पदार्थों का सेवन श्रम उत्पादकता को कम करता है, स्वास्थ्य व्यय बढ़ाता है तथा मानव पूंजी को कमजोर करता है।
- स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव: इससे मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं, एचआईवी/एड्स एवं हेपेटाइटिस जैसे रोगों का प्रसार होता है तथा शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट आती है।
- सामाजिक प्रभाव : मादक पदार्थों का दुरुपयोग पारिवारिक विघटन, घरेलू हिंसा, सामाजिक अलगाव तथा सामाजिक कलंक को बढ़ावा देता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव : मादक पदार्थों का व्यापार नार्को-आतंकवाद, संगठित अपराध तथा युवाओं की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक एकता को कमजोर करता है।
उठाए गए प्रमुख कदम
- भारतीय पहल:
- स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 : यह अधिनियम मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री एवं उपभोग पर प्रतिबंध लगाता है तथा उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करता है।
- नशा मुक्त भारत अभियान: वर्ष 2020 में प्रारम्भ इस अभियान का उद्देश्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा नशा मुक्त भारत का निर्माण करना है।
- सरकार द्वारा 350 एकीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (IRCAs) संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ उपचार, निवारक शिक्षा, जन-जागरूकता, प्रेरक परामर्श, विषहरण, नशामुक्ति उपचार, पश्च-देखभाल एवं सामाजिक पुनर्वास की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
- काशी घोषणा: यह नशा मुक्त भारत के लिए पाँच वर्षीय कार्य-रोडमैप है, जिस पर वाराणसी में आयोजित युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
- भारत ने वर्ष 2047 तक नशा मुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत ने 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते, 16 देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) तथा 2 देशों के साथ सुरक्षा सहयोग समझौते किए हैं, जिनका उद्देश्य NDPS पदार्थों, अग्रदूत रसायनों तथा उनसे संबंधित अपराधों की अवैध तस्करी पर नियंत्रण करना है।
- एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स: अनेक राज्यों ने राज्य स्तर पर मादक पदार्थ नियंत्रण को सुदृढ़ करने हेतु एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया है।
- डार्कनेट निगरानी प्रकोष्ठ: स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) के अंतर्गत स्थापित यह प्रकोष्ठ इंटरनेट के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों की अवैध बिक्री पर निगरानी रखता है।
- संयुक्त समन्वय समिति (JCC): महत्वपूर्ण एवं बड़े मादक पदार्थ जब्ती मामलों की जांच की निगरानी हेतु NCB के महानिदेशक की अध्यक्षता में संयुक्त समन्वय समिति (JCC) का गठन किया गया है।
- वैश्विक पहल
- संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC): UNODC वैश्विक स्तर पर अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध संघर्ष का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
- इसके नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का कार्य करते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय स्वापक नियंत्रण बोर्ड (INCB): INCB वैश्विक मादक पदार्थों की स्थिति की निगरानी करता है तथा विभिन्न देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण संधियों के अनुपालन का मूल्यांकन करता है।
- संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC): UNODC वैश्विक स्तर पर अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध संघर्ष का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
निष्कर्ष
- भारत में बढ़ता मादक पदार्थ संकट सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
- इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार, नागरिक समाज एवं स्थानीय समुदायों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
- साथ ही रोकथाम, पुनर्वास एवं युवाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल देकर ही वास्तविक अर्थों में नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
Source: TH
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